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九品芝麻官

अमेरिका नहीं, इन देशों में बिकेंगे भारतीय प्रोडक्ट्स... देखते रह गए ट्रंप, भारत ने निकाल लिया टैरिफ का तोड़_我的网站

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一 |     जॉब डेस्क, नई दिल्ली। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) के 935 रिक्त पदों पर भर्ती निकाली गई है जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया 27 अगस्त से स्टार्ट कर दी गई है। जो भी अभ्यर्थी स्नातक उत्तीर्ण कर चुके हैं और सरकारी नौकरी की तलाश में हैं उनके पास इस भर्ती में शामिल होने का सुनहरा मौका है।,इच्छुक अभ्यर्थी इस भर्ती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन माध्यम से बीपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन करने की लास्ट डेट 26 सितंबर 2025 निर्धारित है। सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) पदों पर आवेदन के लिए उम्मीदवार का मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/ संस्थान से स्नातक या इसके समकक्ष उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके साथ ही अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु पदानुसार अनारक्षित पुरुष के लिए 37 वर्ष, ओबीसी पुरुष एवं महिला के लिए 40 वर्ष एवं एससी, एसटी पुरुष एवं महिला उम्मीदवारों के लिए 42 वर्ष निर्धारित है। उम्र की गणना 1 अगस्त 2025 को ध्यान में रखकर की जाएगी।,

  • बीपीएससी भर्ती एप्लीकेशन फॉर्म भरने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर विजिट करें।
  • वेबसाइट के होम पेज पर आपको "ऑनलाइन एप्लीकेशन" पर क्लिक करना बाई।
  • इसके बाद New Registration (One Time Registration) पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करना है।
  • पंजीकरण होने के बाद अन्य डिटेल भरकर अभ्यर्थी फॉर्म को पूरा कर लें।
  • निर्धारित एप्लीकेशन फीस जमा करें और फॉर्म को सबमिट करके उसका एक प्रिंटआउट निकालकर अपने पास सुरक्षित रख लें।
,ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के साथ सभी उम्मीदवारों को 100 रुपये फीस का भुगतान करना होगा। फीस के साथ बैंक इत्यादि चार्जेस अलग से देने होंगे। जिन उम्मीदवारों के पास आधार नंबर नहीं है उनको बायोमेट्रिक फीस के रूप में 200 रुपये का भुगतान अलग से करना होगा।,इस भर्ती के माध्यम से 935 पदों पर भर्ती की जाएगी। वर्ग के अनुसार अनारक्षित के लिए 374 पद, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 93 पद, अनुसूचित जाति के लिए 150 पद, अनुसूचित जनजाति के लिए 10 पद, अत्यन्त पिछड़ा वर्ग के लिए 168 पद, पिछड़ा वर्ग के लिए 112 पद और पिछड़े वर्गों की महिला वर्ग के लिए 28 पद आरक्षित हैं।,यह भी पढ़ें- BSF Head Constable Recruitment 2025: बीएसएफ हेड कॉन्स्टेबल भर्ती के लिए आवेदन स्टार्ट, पात्रता सहित पूरी डिटेल करें चेक。    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। टैरिफ को लेकर जारी उथल-पुथल के बीच अमेरिका के विकल्प के रूप में भारत कई बाजार तेजी से तैयार करने की कोशिश कर रहा है। ब्रिटेन के बाद अब अगले महीने यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ व्यापार समझौता हो सकता है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक भारत और ईयू के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता लगभग पूरी हो चुकी है और सितंबर में राजनीतिक स्तर पर बातचीत के बाद इसकी घोषणा की जा सकती है।,वहीं इस साल एक अक्टूबर से यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) देशों के साथ हो चुके व्यापार समझौते पर अमल शुरू हो जाएगा जिससे यूरोप के चार देश स्विट्जरलैंड, नार्वे, आइसलैंड और लिसटेंस्टिन में भारतीय वस्तुएं बिना शुल्क के या काफी कम शुल्क पर निर्यात हो सकेंगी। ब्रिटेन से भी भारत का व्यापार समझौता हो चुका है और अगले कुछ महीनों में यह समझौता भी अमल में आ जाएगा। इस प्रकार यूरोप के तमाम देशों में भारतीय वस्तुओं का निर्यात बिना शुल्क के हो सकेगा।,ब्रिटेन के साथ ईयू में शामिल फ्रांस, जर्मनी, इटली विकसित देशों की श्रेणी में शामिल हैं जहां भारतीय निर्यात को काफी प्रोत्साहन मिलेगा। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ हो चुके व्यापार समझौते को भी विस्तार दिया जा रहा है। न्यूजीलैंड से भी भारत व्यापार समझौता कर रहा है। ओमान से भी अगले महीने व्यापार समझौता हो जाएगा। ऐसे में अमेरिका के बाजार में प्रभावित होने वाले निर्यात की भरपाई आराम से हो सकती है। लेकिन इन व्यापार समझौतों को लागू होने में अभी कुछ माह लगेंगे।,भारतीय निर्यात पर अमेरिका के बाजार में 50 प्रतिशत का शुल्क के जारी रहने पर भारत में विदेशी निवेश का माहौल प्रभावित हो सकता है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश है और पिछले कुछ सालों से अमेरिका के बाजार में भारत के निर्यात में हो रही लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए अमेरिकी कंपनियों के साथ कई अन्य देशों की कंपनियों ने भारत में निवेश करना शुरू कर दिया था या फिर करने की तैयारी में थी।,विदेशी कंपनियां भारतीय बाजार के साथ दुनिया के अन्य बाजार को ध्यान में रखते हुए ही निवेश करती है। जानकारों का कहना है कि ताइवान की कई जूता कंपनियां और अमेरिका की खिलौना कंपनियां भारत में निवेश की तैयारी में थी क्योंकि पिछले कुछ सालों से अमेरिका के खरीदार चीन की जगह भारतीय वस्तुओं को खरीदना पसंद कर रहे थे। पिछले तीन सालों में अमेरिका के बाजार में भारत का निर्यात दहाई अंक में बढ़ा है जबकि चीन का निर्यात घटा है। इसे देखते हुए विदेशी कंपनियां भारत में मैन्यूफैक्चरिंग कर अमेरिका व अन्य देशों को निर्यात करना चाह रही थी।,अब 50 प्रतिशत के शुल्क के बाद फिलहाल निवेश के माहौल को धक्का लग सकता है और इस प्रकार के नए निवेश होल्ड पर जा सकते हैं क्योंकि अमेरिका के बाजार में भारत की वस्तुएं चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, इंडोनेशिया के मुकाबले अधिक महंगी हो जाएंगी। दूसरी तरफ भारत को विदेशी निवेश को बढ़ाना है। सूत्रों के मुताबिक इसलिए चीन के निवेश प्रस्ताव पर सरकार नरम रुख रखते हुए उन्हें मंजूरी देने पर विचार कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस माह के अंत में चीन जा रहे हैं जहां दोनों देशों के बीच व्यापार को आगे बढ़ाने की दिशा में बातचीत हो सकती है।,यह भी पढ़ें- अमेरिकी टैरिफ की काट के लिए भारत का 'ट्रंप कार्ड', सरकार ने बना ली योजना; जानें क्या है पूरा प्लान。

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Published on:04:01:09


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